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Motivational Stories

Best Motivational Story For Student in Hindi 2020

Motivational Story for student in hindi

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Motivational Story for student in hindi for success, best  with moral ये कहानियाँ आपको सफल बना सकती है Real Life Inspirational Stories in Hindi सर्वश्रेष्ठ.

Inspirational Stories in Hindi Motivational Student

अपनी बात

किसी भी कृति की रचना भगवान की प्रेरणा और शक्ति के बिना असम्भव में अपने बड़े भाई विश्वामित्र शर्मा के पास कुछेक दिनों के लिए गत वर्ष कपर गया था। रात्रिकाल को टी.वी. पर समाचार सुन रहा था। विश्व में अनेक गों-सीरिया, अफगानिस्तान, इराक और पाकिस्तान आदि में बम धमाकों में मरने।

बालों, घायल स्त्री-पुरुषों व बच्चों के आंकड़े बताए जा रहे थे। निर्दोष मानव के बहते रक्त, चीखें, दहशतगर्दी और आगजनी के भयानक दृश्य दिखाए जा रहे थे। ऐसा देख सुन कर मेरे मन में अजीब सी पीड़ा, वेदना, घबराहट और उदासी भर जाती है।

उठ कर अपने सोने के कमरे में आकर बिस्तर पर बैठ जाता है। सामने की दीवार पर भगवान गौतम बुद्ध का कलेंडर लटक रहा है। जिसमें बद्ध के अर्थोन्मीलित नेत्रों से प्रेम, करुणा, अधरों पर मधुर हास और मुख मंडल से शान्ति टपक रही है। तपोनिधि गौतम बुद्ध के चित्र को कुछ समय तक ध्यान से देखने पर मन-हृदय को शान्ति और धैर्य मिलता है। सोचता हूँ-‘जगत में हिंसा, पृणा-द्वेष और प्रतिशोध व्याप्त है।

आतक-नाग ने संसार का कोना-कोना अपने नाग-पाश में जकड़ लिया है। ऐसे विकट समय में महात्मा बुद्ध का सन्देश जिसमें प्रेम, करुणा, शांति, समता

और स्वतन्त्रता तथा मानवता भरी हुई है, विश्व-समाज में शांति और स्थिरता स्थापित करने में सक्षम है। बुद्ध के ज्ञान और उपदेश जगत में व्याप्त अज्ञान और अशांति के गहर अंधेरे से निकालकर विश्व-समाज के जीवन-मार्ग को प्रेम, करुणा, समता तथा मानवता के दिव्य आलोक से रोशन कर सकते हैं। बुद्ध धर्म अहिंसा परमोधर्मः । का पाठ पढ़ा सकता है।

कुछेक दिनों तक मन में उथल-पुथल मची रही थी। मन बार-बार सोचता’क्यों न महात्मा बुद्ध पर उपन्यास की रचना की जाए’। फिर ख्याल आता-बुद्ध का ज्ञान अधाह समुद्र है जिसे समझना कठिन काम है। यह तो समुद्र मंथन जसा कार्य है। ऐसा विचार मेरे उत्साह पर पानी फेर देता है। अतः मैंने अपने मन की गांठ डॉ. हरमहेन्द्र सिंह ‘वेदी जी के सम्मुख खोल दी थी।

डॉ. बेदी जी ने मुझे हिम्मत बंधाते हुए कहा-“संसार में कोई भी कार्य असम्भव नहीं होता। हरेक काम को सम्पन्न करने हेतु कठिन परिश्रम, धैर्य और योग्य दिशा-निर्देश की नितांत आवश्यकता होती है। अतएव मुझे पूर्णरूपेण उम्मीद और विश्वास है कि आप गौतम

बुद्ध पर उपन्यास लिखोगे जो ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित होगा। मेरी अभकामनाएं आपके साथ हैं।” फिर डॉ. वेदी जी ने महात्मा बुद्ध के बारे में अध्ययन को कुछ पुस्तकों की सूची बना दी थी। जिन्हें पढ़ना नितांत आवश्यक था। उसके पश्चात् डॉ. बेदी ने मुझे गौतम बुद्ध के सम्बन्ध में अनेक रोचक प्रसंग सुनाए ये। “Story for student in hindi Motivational”

पुस्तके प्राप्त करने को मेरी भागदौड़ लग गई थी। कुछेक पुस्तकें उपलब्ध करवाने में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. सरिता बासिष्ठ और प्रो. राजेन्द्र सिंह पठानिया ने मेरी सहायता की थी। कुछ पुस्तकें चंडीगढ़ से खरीदने में भतीजे अश्विनी शर्मा व पुत्रवधू सीमा शर्मा ने मेरे साथ कड़कती धूप में भाग-दौड़ की थी।

ग्रीष्म ऋतु पूरे यौवन पर थी। जीरकपुर से भतीजे अश्विनी शर्मा ने मेरे ठहरने का प्रबंध शिमला में कर दिया था। लगभग एक महीना मैंने शिमला के सौन्दर्य सम्पन्न, शीतल-शांत स्थान पर रहकर बौद्ध पुस्तकों का अध्ययन किया था। घर पर भी काफी समय बुद्धमत पुस्तकों को पढ़ता रहा। बौद्ध साहित्य बुद्ध को रामावतार मानता है। हिन्दू धर्म गौतम बुद्ध को भगवान विष्णु का नौवां अवतार स्वीकार करता है। देवगण आदि पुरुष नारायण को धर्म-स्थापन और लोक कल्याण हेतु अवतार लेने हेतु अनुनय विनय करते हैं।

महात्मा बुद्ध को चार आर्य सत्यों का सामना करना पड़ा था। उन्हें लगा कि जीवन क्षणभंगुर है। देह जरा धर्मी, रोगधर्मा और मरणधर्मी है। संन्यासी को देखने पर उन्हें जीवन के दुःख-क्लेशों, मरणभय से मुक्त होने का सूत्र हाथ लगा था। दृढ़ मन से निश्चय करके राजकुमार गौतम कामिनी-कांचन, भौतिक सुख और पुत्र मोह की जंजीरों को तोड़कर बोधिसत्य हो गए थे।

सात वर्ष तक उन्होंने कठिन तपश्चर्या की थी। तन-मन को इस तरह रौंद डाला था जिसे पढ़ मानव के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। “Motivational Story for student in hindi” वह चित्तवृत्तियों से लड़कर अंत में युद्धत्व को प्राप्त हो गए थे। अतः बौद्ध धर्म समाज और समय की मांग थे। गौतम बुद्ध का ज्ञान प्राप्त करना केवल अपने लिए ही न होकर सम्पूर्ण मानव जाति के उद्धार हेतु था।

महात्मा बुद्ध के ज्ञान से चार आर्य सत्यों, बुद्ध, धर्म, संघ, आष्टांगिक मार्ग, शील, तपश्चर्या, पाँच स्कन्धों, अहिंसा और भिक्षाटन आदि का पता चलता है। बौद्ध धर्म का आधार मानव प्रेम है। यह धर्म मानव के दुःख क्लेशों से निजात पाने की आशा और भरोसा देता है। बुद्ध मनुष्य को प्रेम, करुणा, दया, समता, स्वतन्त्रता और शांति देता है। 

ज्ञान-प्राप्ति को वह मध्यमार्ग पर चलने को कहता है । गौतम बुद्ध ने लोगों की साधारण भाषा पाली में उपदेश दिए थे। यह मनुष्य की जाति कर्म आधारित स्वीकारता है न कि जाति आधारित।जाति के महंगे कर्मकांडों, यज्ञोंहामा बद्ध ने चारों वर्गों के वास्ते बौद्ध धर्म के द्वार खोल दिए थे। ब्राह्मण

महंगे कर्मकांडों, यज्ञों में बलियाँ, पाखंडावाद और जन्म आधारित जाति बालों को लेकर बुद्ध ने करारी चोट की। ब्राह्मणों की भर्त्सना की थी। यह जीद धर्म को बढ़ने-फूलने में सहायक सिद्ध हुई। लोगों की बौद्ध धर्म के प्रति कायदती चली गई। धीरे-धीरे बुद्ध की शिक्षाएं और ज्ञान की बातें ब्राह्मणों और Motivational Story for student in hindi

जाति वालों की समझ में आने लगी थी। अतः वह भी बौद्ध अनुयायी होनेलगे थे।आरत, दलित और शूद्र लोगों को बौद्ध धर्म में सम्मान, समता और स्वतन्त्रता के आधार पर दीक्षित किया गया। बौद्ध धर्म जाति विहीन था। क्योंकि महात्मा बुद्ध ऐन, शांति, करुणा, दया, समता और स्वतन्त्रता के अवतार थे। वह पतितों. निर्बल. असहाय और पीड़ित लोगों का कल्याण और उत्त्यान करने को तथा मानव-धर्म की स्थापना हेतु धरा पर अवतरित हुए थे।

बुद्ध, धर्म और संघ ही बौद्ध धर्म की आधार मिला था। यही कारण था कि राष्ट्रभक्त, स्वतन्त्रता सेनानी, गंभीर चिंतक, संविधान निर्माता, सचेतक अर्थशास्त्री और अछूत, शूद, दलित लोगों को नया जीवन मार्ग दिखलाने वाला मसीहा – डॉ. भीमराव अम्बेडकर को संसार के सब धर्मों की अपेक्षा . बौद्ध धर्म सर्वश्रेष्ठ लगा था।

वह वर्णवाद आश्रित सामाजिक व्यवस्था का समूह जड़ से उखाड़ कर समतावादी समाज की स्थापना करना चाहते थे। इसीलिए उन्होंने 14 अक्तूबर 1956 को वयोवृद्ध महास्थविर चंद्रमणि से पाँच लाख व्यक्तियों सहित बौद्ध धर्म में दीक्षा ग्रहण की थी। ___महात्मा बुद्ध ने 45 वर्ष तक गाँवों, नगरों और कस्यों में घूम-फिर कर बुद्ध धर्म का अपने अनुयायियों के साथ प्रचार किया था। बौद्ध धर्म को सरल-सुबोध, मानव आधारित और सारगर्भित धर्म । “Motivational Story In Hindi For Sudents”

ने भारत की सीमाओं को लांघ कर विदेशों में अपनी धर्म पताका फहराई थी। बौद्ध धर्म ने राजा से रंक को प्रभावित किया था। अगुलिमाल झक जैसे कर. अत्याचारी व्यक्ति को बौद्ध धर्म में दीक्षित करके सन्मार्ग दखाया था। सम्राट अशोक जैसे राजाओं ने बौद्ध धर्म को अपनाया और बौद्ध उपदेशों को शिलालेखों पर प्रजा कल्याण को खुदवाया था।

गौतम बुद्ध के जनता को दिए उपदेशों में उनकी राजनैतिक, सामाजिक, थिक और आध्यात्मिक दष्टि बड़ी सक्ष्म और व्यापक है। बहुजन हिताय और पजन सुखाय ही उनके जीवन का परम लक्ष्य था। गौतम बुद्ध का स्त्री जाति के आत बड़ा सम्मान था। वह स्त्री विमर्श की बात करते थे। वह अनेक स्थानों पर स्त्री सात का महत्व और उसकी रक्षा की वकालत करते से लगते हैं। बुद्ध पुत्र की अपेक्षास की रचना करना मेरा लघु प्रयास अवश्य है।

जिस समय में इस उपन्यास की रचना कर रहा था, कई बार अस्वस्थ हुआ था। परन्तु डॉ. नरेश बंसल जी ने मुझे उचित चिकित्सा से रोगमुक्त किया है। उन्होंने मुझे इस रचना को पूर्ण करने को धैर्य और शुभकामनाएं दी हैं। मैं अपने स्नेही मित्र का हृदय से आभारी हूँ।

जिन मित्रों व सहयोगियों ने मुझे उपन्यास रचना में सहयोग दिया है उनमें प्रमुख डॉ. हरमहेन्द्र सिंह बेदी, मनोज धीमान, प्रो. फूलचन्द ‘मानव’, डॉ. प्रवीण शर्मा, डॉ. राकेश कुमार, डॉ. लेखराज, अजीत पाल शर्मा, short motivational story for students अश्विनी शर्मा, सीमा शर्मा, उमाशंकर तिवारी, डॉ. अजय शर्मा, राकेश अग्रवाल और सिद्धार्थ अग्रवाल हैं। मैं इन सबका धन्यवादी हूँ।

मेरे परिवार ने भी मुझे इस रचना-निर्माण में पूर्ण सहयोग दिया है। दोनों बेटों कुणाल शर्मा और करुणेश शर्मा तथा पुत्रवधुओं अम्बिका शर्मा व परमेन्द्र शर्मा ने मुझे लेखन हेतु प्रेरित किया है। पोती आयुष्का ने बालसुलभ बातों से मेरा मनोरंजन किया है। मैं अपने परिवार का भी आभारी हूँ।

कुछ मित्र जो समयासमय मुझे निरन्तर लेखन हेतु प्रोत्साहित करते रहे और नई रचना को प्रतीक्षारत रहे हैं, उनमें योगाचार्य श्रीराम गोयल, डॉ. सरोज बाला शर्मा, ऊषा जिंदल, सुनीता जैन, सरदार जगतार सिंह भंदोल, लाभ सिंह और तिलक राज कश्यप का मैं हृदय से आभारी हूँ। आशा है कि पाठकगण इसका रसास्वादन करेंगे।

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