Biography

Best About Mother Teresa In Hindi | {information} [2020]

About Mother Teresa In Hindi

94

Information About mother teresa in hindi language of Points in Main thing 10 Lines Today Best Information Laguage Hindi informational mother teresa hindi

About Mother Teresa In Hindi information

About Mother Teresa In Hindi
About Mother Teresa In Hindi

दयालुता की देवी मदर टेरेसा आज मदर टेरेसा का नाम चहूं ओर है। समाज सेविका, ममता की मूर्ति मदर टेरेसा ने निस्वार्थ भाव से मानव सेवा की। उन्होंने मानव सेवा को ही अपना धर्म समझा। उन्होंने कहा कि बीमार और गरीबों को हमारी सहानुभूति की आवश्यकता होती वरन उनकी देखभाल की जरूरत होती है।

                 मदर टेरेसा अल्बनियन संप्रदाय के परिवार में आती थी। इनका जन्म मगदुनिया के सौपाए नामक स्थान पर हुआ था इनका बचपन का नाम एगनस गोनाक्सा बोझाक्सू था। वे लोग कैथेलिक थे। जबकि अधिकांश अल्बनियन वहां मुस्लिम थे। उस समय उस देश में तुर्की साम्राज्य का शासन था। उनके पिता एक व्यापारी थे। उनकी एक निर्माण कंपनी थी और वे एक खाने की दुकान से संबन्धित थे। वे बहुत यात्राएं करते थे।

Advertisement
Advertisement

  • about mother teresa hindi
  • mother teresa hindi story
  • about mother teresa in hindi language
  • Information about mother teresa in hindi language
about mother teresa in hindi
about mother teresa in hindi

     इस कारण से वे बहुत सी भाषाओं के जानकार हो गये थे और राजनीति में भी उनकी काफी दिलचस्पी थी। वे सांप्रदायिक परिषद् के सदस्य भी थे। उन्होंने एगनस को उदारता की प्रथम शिक्षा अपनी पत्नी और |

                         एगनस की माता, ड्राना के साथ दी। अप्रत्याशित रूप से, जब एगनस 9 वर्ष की थी तो उनकी माता का देहान्त हो गया था। वह 1919 का साल था, जब ड्राना अपने तीन बच्चों, एगा (1904) लेजर (1907) और गोनाक्सा (1910) के साथ अकेली रह गई। उनकी आगे की आवश्यकताओं को देखते हुए,

वह विवाह के जोड़ें और बुनाई के कामों में कठिन परिश्रम से लग गई। इन सभी कामों के बावजूद वह अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए समय निकाल लेती थी। वे रोज चर्च जाती थी और प्रार्थना करती थी। वह अपने द्वार पर आए हुए सभी गरीबों और असहायों की मदद करती थी। छुट्टी के दिनों के दौरान वह एक धार्मिक स्थल पर गई और वहां रूकी, जिस परिवार में महिलाओं को सम्मान देना की रिवाज था।

                एगनस चर्च को पसंद करती थी। वह पढ़ना, प्रार्थना करना और गाना पंसद करती थी। उनकी माता भी अपने पड़ोस की लाचार महिलाओं की देखभाल करती थी। वे उनके पास जाती थी और उसे साफ-सुथरा कर दिन में दो बार खाना खिलाती थी। वह एक छः बच्चों वाली विधवा की देखभाल करती थी। जब ड्राना नहीं जा सकती थी, तब एगनस इस तरह की सेवा के कार्य करने जाती थी। जब विधवा कि मृत्यु हो गई तो उनके बच्चों को घर ले आया गया

  और उन्हें परिवार के सदस्यों की तरह रखा गया। इसी बीच लेजर को ऑस्ट्रिया में छात्रवृत्ति मिली। एगा व्यावसायिक स्कूल जाने लगी और एगनस ने लाइसीयम में दाखिला लिया। वह अच्छी तरह पढ़ी। एगा के साथ उसने गाना भी गाया। जिसमें प्रमुख आवाज उसी की थी। वह गिटार के तरह का एक वाद्य यंत्र भी बजाती थी।

उनके जीवन का महत्वपूर्ण भाग लेगन ऑफ मेरी जाना था। उसने एक पादरी की मदद की जिन्हें, जाति-व्यवस्था पढ़ाने में भाषा की समस्या आ रही

थी। उसने भारत में स्लोवेनियन और क्रोशियाई मिशनरियों के बारे में बहुत कुछ पढ़ी। बारह वर्ष की उम्र में उसने निश्चय किया कि अपना जीवन वह भगवान के कार्यों में लगायेगी। लेकिन वह ऐसा कर पायेगी यह कैसे संभव था?

उन्होंने, इसके लिए बहुत प्रार्थना की और अपनी बहन और माता से इस बारे में बातचीत किया। इसके साथ ही अपने पिता से भी पूछा, “मैं निश्चित कैसे

होऊं?”

          उन्होंने जबाव दिया, “अपनी खुशी के द्वारा। अगर तुम सच में इस विचार से खुश हो कि भगवान ने तुम्हें उनकी सेवा करने के लिए कहा है, कि तुम उसकी और उसके पड़ोसियों की सेवा करो, तो यह तथ्य है कि तुम्हें भगवान ने कहा है।” उन्होंने आगे कहा, “तुम जो आंतरिक खुशी महसूस करती हो वह तुम्हारे जीवन में सही दिशा दिखलायेगा।”

18 साल की उम्र में उसने निर्णय कर लिया। पिछले दो सालों तक वह लेटनीस में विभिन्न धार्मिक संस्थाओं में सहायक रही और यह स्पष्ट किया कि वह भारत में एक मिशनरी के रूप में जाना चाहती है।

1928 में संकल्प दिवस के दिन वह लेटनीस में प्रार्थना करने गई। बाद में वह बहन लौरिटो के साथ काम करने के लिए भारत गई। बहन लौरिटो भारत में बहुत ही सक्रिय रूप से काम कर रही थी।

25 सितंबर, को वह भारत जाने के लिए तैयार हुई। उसे स्टेशन तक छोड़ने आने वालों में उसका पूरा संप्रदाय जिसमें उसकी दोस्त, सहपाठी, पड़ोसी और उसकी माता तथा बहन एगा भी शामिल थी।

वह जर्ब होते हुए ऑस्ट्रिया, स्वीट्जरलैंड, फ्रांस से लंदन होते हुए अबाई पहुंची जो बहन लौरिटो की मातृभूमि थी। गोनाक्सा अंग्रेजी बोलना सिखता था। उन्होंने एक बहन के कपड़े प्राप्त किये और अपना नाम सिस्टर टेरेसा रखा। यह

नाम लिसीक्स की छोटी टेरेसा के नाम पर रखा, जहां वह लंदन जाने में रूकी थी। इसी बीच उनके कागजात तैयार हो गए और बह 1 दिसंबर, 1928 को भारत के लिए चली गई। वह देश जो उसके सपनों का देश था। वह एक लंबी

और थकान भरी यात्रा थी। कुछ और सिस्टर भी उसके साथ थी, लेकिन मुख्य रूप से उसमें एंग्लिकन लोगों का समूह था। कुछ सप्ताहों तक वह लोगों के समूहों से नहीं मिल पाये यहां तक की ईसाइयों के पवित्र पर्व क्रिसमस के गाने गाये।

1929 के प्रारंभ में वे कोलंबों पहुंची। उसके बाद वे मद्रास पहुंची और अंततः कलकत्ता। आगे भी यह यात्रा जारी रही और वह हिमालय के पैरों में बसा एक सुन्दर शहर दार्जिलिंग गई। जहां युवा सिस्टर अपना प्रशिक्षण शिविर चला रही थी। 23 मई, 1929 को उसे एक प्रशिक्षु के रूप में स्वीकार किया गया और उसके दो सालों के बाद उसने अपना पहला संकल्प पूरा किया।

Biography of Mother Teresa in Hindi

Biography of Mother Teresa in Hindi
Biography of Mother Teresa in Hindi

सिस्टर और शिक्षिका

उसे पढ़ने के लिए कलकत्ता भेजा गया, जिससे वो एक शिक्षका बन सके। उसे जब भी समय मिलता या जब भी वह कर सकती थी, वह बीमारों की सेवा करती थी। जब उसकी पढ़ाई समाप्त हो गई तो उसे शिक्षिका का नाम दिया गया और वह प्रतिदिन शहर में चक्कर लगाती थी।

        उसका पहला कार्य था कक्षा को साफ करना। शीघ्र ही वह बच्चों के बीच उसने प्रोत्साहन और विनम्रता के कारण बहुत लोकप्रिय हो गई। उसके छात्रों की संख्या मात्र सौ के करीब थी। उन्होंने देखा कि वे कहां रहते हैं और क्या खाते हैं।

उनकी प्रेम और देखभाल की भावना को देखते हुए शीघ्र ही उन्हें वे ‘मां’ कह कर संबोधित करने लगे। रविवार को या जब कभी भी उन्हें समय मिलता था, वह उनके परिवारों से मिलने जाती थीं।

         24 मई, 1937 को उसने दार्जिलिंग में अपना मुख्य संकल्प लिया। उसे कलकत्ता के केंद्र में एक बंगाली बालिका मध्य विद्यालय की प्रधानाध्यापिका के रूप में नामित किया गया। वहां उन्होंने कुछ समय तक इतिहास और भूगोल पढ़ाया। उनके संस्थान के निकट ही कलकत्ता की सबसे बड़ी स्लम (मलिन बस्ती) थी।

सिस्टर टेरेसा इसे देखकर अपनी आंखें बंद नहीं रख सकती थीं, इसलिए उन्होंने, उसकी देखभाल करनी प्रारंभ कर दी “कौन गलियों और सड़कों में रहने वाले गरीब लोगों के बारे में सोचता है और उसकी देखभाल करता है?” ‘मदर’ के शब्दों में महान सेवा कार्य वह है जिसमें गरीबों की देखभाल की जाय।

             जहां मदर टेरेसा पढ़ाती थी, उस स्कूल में लिगन ऑफ मैरी भी सक्रिय थी। लड़कियों के साथ मदर टेरेसा बराबर अस्पतालों, स्लमों, (मलिन बस्तियों) और गरीब लोगों को देखने जाती थी। वह जिन लोगों के पास गई उसे देखकर उसने यह महसूस किया कि ये लोग प्रार्थना नहीं करते हैं। उन्होंने बहुत ही सावधानीपूर्वक बताया कि वे क्या देखते हैं और क्या करते हैं।

फादर हेनरी जो बेल्जियम के थे, वे एक अध्यात्मिक गुरू थे और अपने कार्यों के द्वारा उन्होंने महान सर्मपण की भावना को साबित किया। वे सिस्टर टेरेसा को कई सालों तक निर्देशित करते रहे । उनकी सर्मपण की भावना से प्रात्साहित होकर टेरेसा के मन में गरीब लोगों के लिए काफी कुछ करने की इच्छा जागृत हुई, लेकिन यह कैसे किया जाय? यह एक प्रश्न था।

          इस सभी बातों का दिमाग में रहते हुए वह 10 सिंतबर को दार्जिलिंग के लिए रवाना हुई। इस यात्रा के बारे में उन्होंने कहा कि, “यह मेरे जीवन की सबसे महत्वपूर्ण यात्रा थीं।” यह तब हुआ जब उन्होंने वास्तव में भगवान की वाणी को सुना।

Mother teresa information in hindi

Mother teresa information in hindi
Mother teresa information in hindi

उनका संदेश स्पष्ट था कि वह स्कूल को छोड़ दे और गरीबों की सेवा के लिए उनके साथ रहे। “यह एक आदेश था, कि शाश्वत शक्ति के लिए कार्य करे।” मैं मानती हूं कि कैसे हुआ?” तब से उस सोसायटी के लिए 10 सितंबर का दिन बहुत महत्वपूर्ण माना जाने लगा और उसे ‘प्रेरणा दिवस’ के रूप में। जाना जाने लगा।

       सिस्टर टेरेसा ने प्रार्थना किया और कुछ अन्य सिस्टरों के साथ बात की जो उसके पास कलकत्ता के विशप, मौंगसिगनर प्रायार से मिलने गई थी। उन्होंने, उसे मदर के कार्यों के बारे में बताया, लेकिन उसने उसे वैसा करने की इजाजत नहीं दिया। उसने इसके बारे में फादर हेनरी और केलेस्टे वान से बात किया, जो टेरेसा को अच्छी तरह जानते थे। उन्होंने समस्या को व्यापक रूप से समझा,

 

जिसमें भारत, शीघ्र ही आजाद होने वाला था और सिस्टर टेरेसा एक यूरोपीयन थी। इसके साथ ही वहां राजनीतिक और अन्य खतरे भी थे। वे इस मुद्दे पर रोम की प्रतिक्रिया के बारे में भी विचार कर रहे थे कि यदि रोम भी इसे स्वीकृति देता।

  • some information about mother teresa in hindi

       विशप ने सिस्टर टेरेसा से कहा कि वो इस निर्णय के लिए प्रार्थना करे। इसके कम से कम एक साल के बाद सिस्टर ने गहरे नीले रंग की साड़ी पहनी

और गरीबों के बीच काम करने लगी। सिस्टर टेरेसा ने इस बात पर कोई ध्यान नहीं दिया कि उसकी सही प्रतिक्रिया मिल रही है या नहीं। वह गरीबों के लिए उनके बीच जीना चाहती थी।

        एक साल के बाद जब सिस्टर टेरेसा ने अपनी भावना को पुनः आर्कबिशप के पास व्यक्त किया तो बिशप उन्हें अनुमति प्रदान करना चाहते थे लेकिन उन्होंने निश्चय किया कि अगर इसकी अनुमति रोम से या फिर डबलिन में स्थित मदर जनरल से ली जाये तो बेहतर होगा। इस निर्णय में काफी समय लगा।

अगस्त 1918, को मदर टेरेसा को लौरेटो संप्रदाय छोड़ने की अनुमति इस आधार पर मिली कि उसने गरीबों के लिए पूर्णता से अपना कार्य करने का संकल्प लिया था। वह तब 38 साल की थी जब उन्होंने सिस्टर और लोरेटो संप्रदाय को छोड़ा। उसके बाद उन्होंने सस्ती सफेद रंग की नीली धारी वाली साड़ी को पहना।

               सबसे पहले वह नर्स की प्रशिक्षण के लिए पटना गई जहां अन्य सिस्टर भी प्रशिक्षण प्राप्त कर रही थी। यह सत्य ही था अगर वह यह नहीं जानती कि कैसे साफ-सफाई की जाती है और मरीजों की देखभाल कैसे की जाती है, तो वह कैसे उनके गंदे और बीमारी के आदतों को दूर करने में उनकी मदद कर सकती थी। चिकित्सीय प्रशिक्षण उनकी नई संकल्प के लिए अत्यावश्यक । थीं।

पटना में एक डॉक्टर ने टेरेसा को बहुत सी अच्छी सलाह दी, जब सिस्टर टेरेसा ने उनसे पूछा कि कैसे उन गरीबों के बीच रहकर उनकी सेवा और देखभाल की जा सकती है। जब सिस्टर टेरेसा ने कहा कि यह नमक और चावल पर ही जीवन यापन करना चाहती है जैसा कि गरीब लोग करते हैं

तो उसके जबाब में डॉक्टर ने कहा कि यह अपने संकल्प को पूरा करने और उसमें पूरी तरह लीन होने के लिए आवश्यक कदम है। लेकिन आपने जिस संकल्प को ठाना है, उसे पूरा करने के लिए अच्छे स्वास्थ होना भी बहुत आवश्यक है।

      कलकत्ता वापस आकर सिस्टर टेरेसा स्लमों या मलिन बस्तियों और सड़कों में घूमती थी और गरीब तथा असहाय लोगों से बात कर उनकी सहायता करती थी।

                                   वह हमेशा अपने साथ एक साबुन का टुकड़ा और पांच रूपये रखती थी। वह बच्चों को साफ करने में मदद करती थी और उसके घावों को स्वयं साफ। करती थी। गरीब लोग उसे देखकर अचंभित हो जाते थे और सोचते थे कि यह यूरोपीयन महिला कौन है,

जो एक सस्ती सी साड़ी पहने हुए है? वह धारा-प्रवाह बंगला बोलती थी। और जो हमें साफ रहने में मदद कर रही है, और हमारी देखभाल कर रही है।

                 इसके बाद शीघ्र ही उसने गरीब लोगों के बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया कि कैसे पढ़ा जाता है और कैसे लिखा जाता है, कैसे साफ रखा और रहा जाता है। बाद में उन्होंने एक छोटा सा स्थान खरीदा और वहां पर अपना एक स्कूल स्थापित किया।

वह स्वयं गरीब लोगों की बहनों के साथ सोती थी। भगवान की उस पर बहुत कृपा थी और उसे अपने कार्यों के लिए उनसे बहुत प्ररेणा और सहायता मिलती थी। यह सत्य था कि उन्हें हमेशा सही दवा, कपड़े, खाना और गरीबों को आश्रय प्रदान करने के लिए स्थान आसानी से मिल जाते थे, जिससे वह ।

उनकी सहायता करने में सक्षम हो पाती थी। दोपहर में जो बच्चे प्रतिदिन आते थे उन्हें एक कप दूध और एक साबुन का टुकड़ा दिया जाता था। लेकिन उन्हें भगवान के बारे में भी सुनना पड़ता था, जो वास्तव में उनकी मदद करते थे और उनको प्यार करते थे।

mother teresa in hindi essay
about-mother-teresa-in-hindi-essay
about mother teresa in hindi essay

मर्मस्पशी घटना

                एक दिन एक संपन्न परिवार की एक बंगाली लड़की जो सिस्टर टेरेसा की। पूर्व छात्र भी थी, वह सिस्टर के साथ रहना और उनकी कामों में मदद करना। चाहती थी। यह एक मर्मस्पर्शी घटना थी लेकिन सिस्टर टेरेसा वास्तविकता में विश्वास करती थी उन्होंने उसे उस कार्य की गरीबी और कठिनाईयों से अवगत है।

इस दिन को पांच साल भी नहीं हुए थे कि यह संस्था सीधे पोप के नियंत्रण में चली गई। किसी भी संस्था या सोसायटी को चलाने के लिए एक आधारभूत तथ्य होता है कि सिस्टर को जीसस से प्रेम करना चाहिए, अपनी इच्छाशक्ति से मुक्त होना चाहिए,

                     अपनी इच्छाशक्ति से मुक्त होना चाहिए और गरीबों की सेवा के लिए काम करना चाहिए, यह उनका चौथा संकल्प था। यह ईसा मसीह का उपदेश लोगों में फैलाने का उनका अपना तरीका था। इसके साथ ही गरीब लोगो के लिए काम करना था।

जीवन का उद्देश्य

 जब बीमार और असहाय लोगों की संख्याओं में वृद्धि हुई तो उसके साथ ही मुफ्त में सेवा प्रदान करने के लिए समर्पित सिस्टरों की संख्या में भी उत्तरोत्तर वृद्धि हुई ।

सिस्टरों को आवश्यक आवश्यकताओं के लिए एक उपयुक्त घर की खोज की जाने लगी। इस समस्या का भी समाधान हो गया। पाकिस्तान में रहने वाले एक मुस्लिम ने अपने विशाल घर को बहुत ही कम कीमत पर बेचा, जिसे मदर टेरेसा ने खरीद लिया। उसके बाद वह स्थान ही मदर टेरेसा के घर के नाम से प्रसिद्ध हुआ जो 54 ए, लोअर सर्कुलर रोड में स्थित है।

hindi essay mother teresa 

ये ईसाई सन्यासिन पहले बंगाल में आई और उसके बाद पूरे भारत में फैल गई उसके पश्चात् पूरे विश्वभर में । इसकी संस्थापिका भी प्रारंभ में एक प्रशिशु शिक्षिका ही थी।

आध्यात्मिक प्रशिक्षण के लिए उन्होंने एक फादर से कहा लेकिन उन्होंने कहा कि यह मुद्दा उनके घर और उनके समुदाय का है। इससे बाह्य हस्तक्षेप नहीं चाहती थी। यह स्पष्ट था कि यह उनका उत्तरदायित्व नहीं था। वह आंतरिक मामलों में

        गिरावट आने लगी तो उन्होंने इच्छा जाहिर की, वह अब इस उत्तरदायित्व को जारी नहीं रख सकती है। 13 मार्च, 1997 को संस्था ने सिस्टर निर्मला को इस महत्वपूर्ण और पुनीत कार्य के लिए चुना। 5 सितंबर, 1997 को 87 वर्ष की उम्र में सदी की सबसे प्रिय महिला का देहावसान हो गया। उनकी मृत्यु लंबी बीमारी

और ह्दयाघात के कारण हुई। उनका अंतिम संस्कार 13 सितंबर, 1997 को किया गया। यह उनकी दिव्य शक्ति की 51 वीं वर्षगांठ भी थी। लगभग सौ ननों ने मदर टेरेसा की तरह नीली पट्टी वाली सफेद रंग की साड़ी पहनकर उनके, उस पुराने घर के डायनिंग रूम में जिसमें मदर टेरेसा रहती थी, उसके

टाउन हॉल गई और कहा कि मुझे एक स्थान चाहिए जहां मैं उन लोगों की देखभाल कर सकू क्योंकि उन दिनों मैं बहत से लोगों को सड़कों पर गिरे हुए देखती थी।

                स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मुझे काली मंदिर के पास ले गये और मुझे एक धर्मशाला को दिखलाया, जिसका उपयोग यात्रियों द्वारा ‘मां काली’ की पूजा करने के पश्चात् आराम करने के लिए किया जाता था। उस मकान के बारे में मुझसे पूछा, अगर मैं उसका उपयोग करना चाहूं। खास कर इसलिए क्योंकि वह हिंदुओं का पूजा स्थल था।

24 घंटे के भीतर हम लोग, वहां बीमारों और पीड़ितों को लेकर आ गए और पीड़ित अभावग्रस्त लोगों के लिए घर’ की शुरूआत कर दिया।”

            उसके बाद तब से हजारों स्त्री-पुरूष और बच्चों को कलकत्ता की सड़कों से उठाकर यहां लाया जाता था, और उन्हें घर का वातावरण दिया जाता था। उनमें से आधे मर जाते थे। अपने अंतिम समय में वे मानवीय और दैवी प्रेम को पाते थे।

वे भी महसूस करते थे कि वे भी ईश्वर की ही संतान हैं। उनमें से जो बच जाते थे उसके लिए मदर काम की तलाश करती थी या फिर उन्हें उन घरों में भेज देती थी जहां वे घर के वातावरण में कुछ साल खुशी से रह सकें। ।

निराश और पीड़ितों का घर शीघ्र ही बहुत लोकप्रिय हो गया और यह उन पीड़ितों और निराश लोगों के लिए प्रमाणिक जगह के रूप में हो गया। उन्हें उस स्थान पर लाया जाता था, जब उनके लिए कहीं और जाने के लिए कोई स्थान नहीं बचता था।

उन्हें साफ किया जाता था, साफ कपड़े पहनाये जाते थे और उन्हें उपयुक्त चिकित्सीय सुविधा प्रदान की जाती थी तथा उनका बहुत ध्यान रखा जाता था। पूरे भारत और विश्व में चैरिटी ऑफ मिशनरी’ के निराश और पीड़ितों तथा

                      रूढ़िवादी सोच के अनुसार यह मानसिकता है कि यह रोग किसी को भगवान के द्वारा दी गई सजा है। इस तरह लोग इस बीमारी को बिना किसी शिकायत के स्वीकार कर लेते हैं और उससे पीड़ित रहते हैं। भारत में कुष्ठ रोगियों की स्थिति बहुत दयनीय है।

उन पर समाज के द्वारा प्रतिबंध लगाये गये हैं यद्यपि वे बहुत अमीर या फिर बहुत पढ़े-लिखे ही क्यों न हों। वे अपने काम और परिवार से परित्यक्त कर दिया जाते हैं। खाना खाने के लिए उन्हें लोगों से भीख मांगने की नौबत तक आ जाती है। वे एक जानवर की तरह जीते और मरते हैं।।

         जब मदर टेरेसा ने कहा कि यह एक रोग है, भगवान के द्वारा दी गई कोई सजा नहीं और बहुत से मामलों में इसे पूरी तरह ठीक भी होते देखा गया है। लेकिन उन्हें लोगों का उतना सहयोग नहीं मिला उन्होंने एक छोटा सा गांव स्थापित करने का विचार किया। जिसमें कुष्ठ रोगी रह सकें और अपना कुछ काम भी कर सकें और हम लोग उनकी देखभाल भी कर सकें। इसके लिए उन्हें उपयुक्त स्थान की तलाश थी।

                            डेसमंड ड्यूग ने मदर टेरेसा के बारे में लिखी अपनी पुस्तक में कहा है कि रेल लाईन के किनारे कुछ रोगियों के लिए एक जमीन अधिकृत किया। वहां । उन्होंने एक कॉलोनी बनाकर कुष्ठ रोगियों को बसाया वहां कुष्ठ रोगियों ने अपने से बांस की झोपड़ी बनाई और उसके मैदान में काम करने लगे। यह खतरे ।

से खाली नहीं था क्योंकि कुष्ठ रोगी तेजी से रेलमार्ग को पार नहीं कर सकते थे। एक सहमति के अनुसार बीमार लोग अपने कपड़े और अपने घावों के लिए पट्टियां और दवाओं के लिए बैग को बनाते थे।

मदर ने एम, मुगरिज को बताया, “बहुत सी हमारी सिस्टरों को विशेष रूप से इसके लिए ही प्रशिक्षण दिया जाता था कि वे कुष्ठ रोगियों के बीच जाकर काम करे।” हम अच्छी दवाओं को इस्तेमाल करते थे और अगर मरीज सही

प्रार्थना करेंगे। ईश्वर को इसके लिए धन्यवाद देना चाहिए कि उन्होंने हमें यहां

आने और एक साथ प्रार्थना करने का अवसर प्रदान किया है। हम लोग यहां मुख्य रूप से प्रेम, खुशी और शान्ति के लिए प्रार्थना करने के लिए आए हैं। हमें याद दिलाना चाहिए कि ईसा गरीबों के लिए अच्छे समाचार लेकर आएंगें।

  • about mother teresa in hindi language

         जब उन्होंने कहा कि क्या शुभ समाचार है तब उन्होंने हमें बताया, “मेरी शांति आपके साथ है, मैं अपनी शांति आपको दे रही हूं।” वह हमें शांति प्रदान करने नहीं आएंगे अगर हम इस संसार में एक-दूसरे की चिन्ता न करें। वह हृदय से शांति प्रदान करने तव आएंगें, जब हम दूसरों के लिए अच्छा करेंगे।

ईश्वर विश्व को बहुत प्रेम करते हैं इसलिए उन्होंने अपने बेटे को दिया। यह एक उपहार के रूप में था। ईश्वर ने अपने पुत्र को एक कुमारी माता को दिया

और उन्होंने उसके साथ क्या किया? जैसे ही ईसा मेरी के जीवन में आए शीघ्रता से वह अच्छे समाचार देने की जल्दी में रहती थी। उसकी चचेरी बहन एलिजावेथ के घर में भी कुछ इसी तरह की घटना घटी, उसे महसूस हुआ कि उसके पेट में जो बच्चा है वह खुशी से उछल रहा है।

ईश्वर की शांति और खुशी के लिए मैरी के पेट में आया है, इस महान प्यार को देखने के बाद क्रॉस पर ईसा की भी मृत्यु हो गई।

वे हम लोगों के लिए मरे, कुष्ठ रोगियों के लिए मरे और भूख से मरने वालों के लिए मरे इसके साथ ही वे सड़कों पर पड़े असहाय पीड़ितों जो न केवल कलकत्ता बल्कि अफ्रिका और विश्व के अन्य किसी भी स्थलों में रहने वालों के लिए अपना प्राण त्याग दिया। हमारी सिस्टर उनके गरीब लोगों की सेवा विश्व के लगभग 105 देशों में कर रही है।

                 विकास में तेजी संस्थान के कार्यों में तेजी से वृद्धि होने लगी और इसका विकास भी काफी हो गया था। इस संस्थान की सिस्टर पूरे भारत में ही नहीं बल्कि विश्व के बहत से देशों में भी सक्रिय थी और काफी काम कर रही थी।

वे लोग वेनेजुएला से जोर्डन, इटली से तंजानिया और रूस तक फैली हुई थी। बहुत से विशप ने । सिस्टरों की मांग करने लगे और खास कर भारत में काफी विचार-विर्मश, प्रार्थना

               और सोच-समझ कर मदर टेरेसा ने उसके विस्तार करने को स्वीकार किया। उन्होंने रोम में शराबियों, नशेड़ियों और बेघरों के लिए आश्रम खोलें। पोप ने मदर टेरेसा से अनचाहे गर्भवती महिलाओं के लिए भी एक आश्रम खोलने को कहा। उन्होनें भारत में गैर-इसाई प्रशिक्षुओं को अपने समुदाय में शामिल किया। इसके लिए एक शत थी

कि वे पूर्ण रूप से अपना जीवन ‘मिशनरी ऑफ चैरिटी’ को समर्पित कर दें। उन्होंने कहा कि कम्युनिस्ट देशों में बदलाव के साथ ही उन्होंने रूस, पोलैंड, क्रोशिया इत्यादि देशों में अपनी मिशनरियों की शाखाओं की स्थापना की।

भोजन प्रदान करना

बहुत से बड़े शहरों में जहां बेघरों और बहुत से ऐसे लोग जिनको रहने के लिए कोई स्थान नहीं होता और उनकी देखभाल करने वाला भी कोई निश्चित नहीं होता, ऐसे लोगों के लिए इस समुदाय की सिस्टर सूप किचन (भोजन प्रदान करना) की व्यवस्था करती थी।

इस प्रकार उस तरह की स्त्रियों और पुरुषों को गर्म और अच्छा खाना मिल जाता था। वे लोग एक छोटे परिवार की तरह रहते थे। जहां परस्पर देखभाल का विकास होता था। सिस्टर पर्व त्यौहारों यथा

प्रार्थना से प्रेम

“दिन के दौरान कभी भी प्रार्थना की आवश्यकता महसूस हो सकती है। प्रार्थना हृदय को खोलता है, और ईश्वर को स्वयं में समाहित करने में सक्षम होता है। पूछो और खोजने की कोशिश करो, तुम्हारा हृदय इसे प्राप्त करने के लिए काफी बड़ा है और उन्हें अपनी तरह रखो।” ‘मदर टेरेसा’

फल…

“मौन का फल प्रार्थना है प्रार्थना का फल विश्वास है। विश्वास का फल प्रेम है प्रेम का फल सेवा है सेवा का फल शांति है।”

पोप पॉल की प्रार्थना

“ईश्वर! हमें सम्पन्न बनाओ, जिससे मैं सारे विश्व के अपने बंधुओं की सेवा कर सकू। जो गरीबी और भूख में रहते हैं और मर जाते हैं। हमारे हाथों के द्वारा उन्हें खुशहाली दो, उनकी रोज की रोटी और उनके लिए हमारे प्रेम की समझ, उन्हें प्रेम और खुशहाली प्रदान करती है।”

संत फ्रांसिस की प्रार्थना “ईश्वर! मुझे अपनी शांति के लिए एक माध्यम बनाओ, जिससे जहां घृणा

है, वहां में प्रेम ला सक, जहां गलती है, वहां में क्षमा की भावना ला सकू, जहां विवाद है, वहां में प्रेम या मैत्री ला सक, जहां गलती है, वहां में सत्यता ला सकू, जहां शक है, वहां विश्वास ला सकू, जहां निराशा है,

वहां आशा ला सकू, जहां छाया हो, वहां प्रकाश ला सक, और जहां उदासी हो, वहां खुशहाली ला सकू। ईश्वर, मुझे आशीर्वाद दें कि मैं सुविधा से रह सकू।”

  • about mother teresa in hindi

शांति के लिए प्रार्थना

  • जीवन से मृत्यु तक, झूठ से सच तक मेरा नेतृत्व करो, भय से विश्वास तक, निराशा से आशा तक मेरा नेतृत्व करी,
  • घृणा से प्रेम तक, युद्ध से शांति तक मेरा नेतृत्व करो, हमारे हृदय में और विश्व में शांति की भावना भर दो हमारे ब्रह्मांड में…..शांति और शांति ही रहे।

पवित्र आत्मा के लिए प्रार्थना

  • 9 “हे! पवित्र आत्मा मुझमें वायु का संचार करो, जिससे मेरे सारे विचारपवित्र हो सकें,
  • है! पवित्र आत्मा, मुझमें सक्रिय हो, जिससे मेरे सारे कार्य पवित्र हो सकें,
  • है, पवित्र आत्मा, तेरे हृदय की सृष्टि करो जिससे मैं प्रेम कर सकूँ और वह प्रेम पवित्र हो,
  • हे! पवित्र आत्मा, मुझे शक्ति प्रदान करो जिससे में उसका सामना कर सकू जो पवित्र है,
  • हे! पवित्र आत्मा, मुझे निर्देशित करो जिससे मैं हमेशा पवित्र रह सकू।।भी पवित्र हो,
  • हे पवित्र आत्मा! मुझे इतनी शक्ति दो कि मैं सारी पवित्र चीजों का सामना कर सकू,
  • हे पवित्र आत्मा! मेरी रक्षा करो, जिसस में हमेशा पवित्र रह सकू।

हृदय में जब तक प्रेम हो

इसके न मानने वाले भी लेकिन जो इसाई धर्म के थे, वे इससे आश्चर्यचकित थे कि वह सिस्टर, जो एक सफेद और सस्ती साड़ी पहने हुए रहती थी वह सालों से साहस और शक्ति से बुद्धिमानीपूर्ण तरीके से अपना कार्य कर रही थी।

        जब मदर टेरेसा से यह प्रश्न किया गया तो उन्होंने अपने ‘मिशनरी ऑफ चैरिटी’ के पूरे समुदाय तथा ईश्वर के प्रेम को ध्यान में रखते हुए बोली।

“सिस्टरों की गतिविधियां और हम लोग जो सब करते हैं वह केवल प्रार्थना का फल मात्र है। हमारी एकता ईसा (जीसस) में है। इस एकता को धन्यवाद। इस एकता ने ही यह संभव बनाया कि हम” कुष्ठ रोगियों, मरे हुए या गिरे हुए लोगों, बच्चों, अवांछितों और अन्य लोगों की सेवा करने में सक्षम हो सकी।

  • mother teresa biography in hindi

     जब शाम को हमलोग घर वापस आते हैं तो आधा घंटा पूजा में लगाते हैं। ‘मिशनरी ऑफ चैरिटी’ का यह सबसे बड़ा धन है।”

समाज के प्रारंभ के समय यह एक प्रार्थनामूलक समुदाय था, घर पर प्रार्थना, सड़कों पर प्रार्थना, कार्य के वक्त प्रार्थना की जाती थी। उस समय पूरे विचार से सक्रिय रूप से हमारी माता की पूजा या प्रार्थना की जाती थी। प्रत्येक साल 7 अक्टूबर को होने वाला त्यौहार हमारी माता का त्यौहार है,

जो हमारी सिस्टर के धार्मिक जीवन के लिए आदर्श थी। हमारी माता के प्रति मदर टेरेसा बहुत सम्मान करती थी। उनकी अध्यात्मवाद का मुख्य विचार इसमें देखा जा सकता

समय तक आश्रम में रहना पड़ता था। इसे ‘आओ और देखो’ काल के नाम से जाना जाता था। किसी भी एक सिस्टर के साथ गंभीर बातचीत के बाद जिसमें आपकी भावनाएं, इच्छाएं, स्वास्थ्य पर विचार किया जाता था।

अगर इसका परिणाम हमारे जीवन की तरह ही रहा तो आपको इस समुदाय में शामिल किया जा सकता है। सक्रिय और आध्यत्मिक शाखाओं की सिस्टरों को छह सालों का प्रशिक्षण दिया जाता था। उसमें उन्हें यह बताया जाता था

जिज्ञासा-छह महीने

  •  (पोस्ट्यूलेंसी)- लगभग एक साल तक
  • व्यावहारिक प्रशिक्षण (नाविशियेट)- पहले संकल्प के पूरे होने के बाद दो। साल तक लड़की या महिला, सिस्टर बन जाती है।
  • (जूनियरेट)- पांच सालों तक, जिसमें प्रत्येक साल संकल्पों का नवीनीकरण किया जाता था। संकल्पों को केवल कनिष्ठों के अनुरोध पर ही नवीनीकरण किया जाता था।
  • टरटेनशिप- प्रथम संकल्प के बाद छठे साल में एक साल तक! इस साल के अंत तक मुख्य संकल्प के पहले सिस्टर तीन सप्ताह के लिए वापस आती है, यह समय उनके लिए होता है कि वे इस पर विचार करे कि क्या वे सच में अपना सारा जीवन ‘मिशनरी ऑफ चैरिटी’ की सेवा में लगायेगी। अंततः प्रशिक्षित सिस्टर।

धार्मिक जीवन

सिस्टरों की दिनचर्या लगभग इस तरह की होती थी।

  • 04.30 में उठना
  • 5.00 सुबह की प्रार्थना
  • 6.00 आध्यात्मिक अध्ययन और ध्यान
  • 7.00 समूह 07.30 सुबह का नाश्ता
  • 8.00 गृहकार्य 09.00 मिशनरी के कार्य
  • 12.00 दोपहर की प्रार्थना
  • 12.30 ‘भाजन
  • 0 13.00 हमारी माता के कार्यालय
  • 013.30 आराम  14.00 चाय
  • 14.15 आराधना
  • 17.15 कपड़े धोने का समय
  • 19.30 रात्रि भोजन
  • 20.00 स्वरूचि
  • 21.00 शाम की प्रार्थना
  • 21.15 रात्रि प्रार्थना
  • 21.30 सोने का समय।

मदर टेरेसा के विचार

  •  गरीब लोग महन व्यक्ति होते हैं। – सभी अपने आप।
  • 7 अक्टूबर का विचार।

सभी अपने आप

“अगर तुम शब्दों के साथ प्रार्थना करते हो तो उसे तुम अपने दिल की असीम गहराईयों के प्रेम से भर दो। पूरे सम्मान और विश्वास के साथ प्रार्थना करो। अपने हाथों को मोड़कर, आंखों बंद कर हृदय को ईश्वर पर छोड़ दो। अपनी प्रार्थना को पूरी तरह ईश्वर को समर्पित कर दो।

बहुत तेज आवाज में। प्रार्थना मत करो और न ही शांत रहो। साधारण रूप से प्रार्थना करो। अपने हृदय को बोलने दो। अपने हृदय से ईश्वर की प्रशंसा करो। शब्दों को अपने हृदय की असीम गहराईयों से आने दो और प्रार्थना में पूरी खुशी का अनुभव करो । एक शब्द के बाद थोड़ी देर रूकों और फिर इस पर सोचों, इसे अपने हृदय की तह तक जाने दो।”

  • about mother teresa in hindi

7 अक्टूबर पर उनके विचार

मेरे जीवन के अंतिम समय तक जीसस मेरे लिए,

  •  मेरे ईश्वर
  • मेरे प्रियतम – मेरे जीवन
  •  मेरे एकमात्र प्यार
  •  मेरे सर्वस्व
  • मेरे सर्वोच्च ईश्वर
  •  जीसस मैं, पूरे दिल से आपको प्रेम करती हूं जीसस मैं तुम्हें आत्मा से प्रेम
  • करती हूं। मैंने तुम्हें अपना सब कुछ दे दिया, यहां तक की अपना पाप की और उसने

मुझे अपनी नव वधू की तरह अपने प्रेम में समाहित कर लिया। तब से लेकर अपने जीवन के अंत तक मैं अपने सूली पर चढ़े दुल्हे की दुल्हन बनी रही।”

प्रेम के बारे में

मदर टेरेसा के अनुसार, “यह मत सोचो की प्रेम सच है, यह असाधारण भी हो सकता है। प्रेम को जारी रखने के लिए क्या आवश्यक है? एक लैम्प कैसे जल सकता है, अगर वह लगातार तेल की बूंदें न अवशोषित करें?

जब तेल नहीं होता है तो प्रकाश भी नहीं होती है। दुल्हा कहेंगे, ‘मैं तुम्हें नहीं जानता हूं। प्यारे मित्र क्या तुम्हारे लैम्प में मेरा प्रेम रूपी तेल की बूंद है? ये दैनिक जीवन के लिए एक छोटी बातें हैं, यथाः प्रेम, खुशी, उत्साह, छोटी अच्छी चीजें, मानवता और संयम।

हमारा मध्यम मौन, सुनना, माफ करना, बोलना और कार्य करना है। यह वास्तविक तेल की बूंदें हैं जो जीवन भर हमारे लैम्प को जलाते हैं और प्रकाश फैलाते हैं। जीसस को दूर मत देखो वह वहां नहीं हैं। वह तुममें हैं, अपने जीवन के लैम्प पर ध्यान दो, तुम देख पाओंगे।

  • मदर टेरेसा का अस्पताल में अध्यात्म
  •  जून 19, 1983 10 “कौन तुम्हें कहेगा मैं कौन हूं”
  • तुम ईश्वर हो। – तुम ईश्वरों के ईश्वर हो।
  • तुम फादर के साथ एक ही तत्व हो।
  • तुम जीवित ईश्वर की संतान हो।
  • तुम फादर के साथ एक हो।
  • About mother teresa in hindi

बोझ थे और जो सभी के द्वारा अलग कर दिये गए थे।

             हमें भगवान को इस अवसर को प्रदान करने के लिए धन्यवाद देना चाहिए कि हमलोग आज एक साथ हैं, शांति के उपहार के साथ हमें वह भी याद दिलाती है कि हमने जीवन में उस शांति का निर्माण किया और वह जीसस (ईसा) एक आदमी है जो गरीबों के लिए अच्छा समाचार लेकर आया है। वह भगवान है और वह घोषणा करता है कि वह अच्छे समाचार देने के लिए आया

यह अच्छा समाचार शांति का था, जिसे हम दिल से चाहते थे। ईश्वर इस संसार को बहुत प्रेम करते हैं इसलिए उन्होंने अपने बेटे को इस संसार में भेजा। मैं आपको कुछ भयावहता बता रही हूं। हमलोग गर्भपात का विरोध और उसका मुकाबला, बच्चों को गोद लेकर कर रहे हैं।

           हमलोगों ने हजारो प्राणों की रक्षा की है। हम लोगों ने विश्व के सभी अस्पतालों और पुलिस स्टेशनों को यह संदेश भेजा कि, “कृपया बच्चे को क्षति न पहुंचायें, हम लोग बच्चों को ले लेंगे।”

इसलिए प्रत्येक घंटे चाहे वो दिन हो या रात कोई न कोई अवश्य रहता है। हम । लोगों ने अविवाहित माताओं को कहा, “आओ हम लोग तुम्हारी देखभाल करेंगे, हमलोग तुम्हारे बच्चों की देख-रेख करेंगे और हम लोग बच्चों को एक घर प्रदान करेंगे।” हम लोगों के पास वैसे परिवारों से बच्चों की मांग काफी आने लगी जिनके परिवारों में बच्चे नहीं हैं और वे बच्चे चाहते हैं।

         यह हमलोगों के लिए ईश्वर का आर्शीवाद है। इसके साथ ही हमलोगों ने एक और चीज किया जो बहुत ही सुन्दर था। हम लोगों ने अपने भिखारियों, कुष्ठ रोगियों, मरीजों मलिन बस्तियों में रहने वालों, गलियों में रहने वाले हमारे लोगों को वास्तविक परिवार ।

नियोजन के बारे में शिक्षित किया। पिछले छह सालों में केवल कलकत्ते में ही 61273 बच्चे कम पैदा हुए क्योंकि

  • समाहित करते हैं। वह आवश्यक है। हम कितना ज्यादा देते हैं वह आवश्यक है।
  •  वस्त्रहीनता केवल एक कपड़े के टुकड़े के लिए नहीं है, बल्कि यह मानव
  • की गरिमा या प्रतिष्ठा की कमी है। इसके साथ ही एक-दूसरे के प्रेम और ।
  • आदर में कमी है। । यहां प्रेम की भयानक भूख है। हमलोगों को भी अपने जीवन में पीड़ा और ।
  • अकेलापन जैसी चीजों का अनुभव हुआ होगा। हमें निश्चित रूप से इसका सामना करने का साहस होनी चाहिए। तुम्हारे परिवार में ही गरीब हो
  • सकता है, उसे पहचानो और उन्हें प्रेम करो। — बोलने से पहले यह आवश्यक है कि तुम पहले सुनो। ईश्वर तुम्हारे शांत
  • हृदय में बातें करते हैं। प्रेमपूर्वक उनसे बाते करों । तुम्हारे चेहरे पर, आंखों में, तुम्हारी मुस्कुराहटों में दयालुता का भाव होना चाहिए और गर्मजोशी से मिलना चाहिए। हमेशा प्रसन्नचित हंसी हंसनी चाहिए। केवल अपनी देखभाल ही नहीं देना
  • चाहिए, बल्कि अपना हृदय भी उन्हें प्रदान करना चाहिए। ।
  •  तुम्हारे पास बहुत है, तुमने बहुत अधिकृत किया है और बहुत कम तुमने दिया है। गरीबी हमारे लिए आजादी है। यह एक सजा नहीं है।
  • यह प्रसन्नचित्त आजादी है। वहां कोई टेलिविजन नहीं है, कुछ ये नहीं हैं – कुछ वो नहीं हैं। लेकिन हमलोग वास्तव में खुश हैं। 10 अगर आप विन्रम ह कोई स्पर्श नहीं कर सकता, न तो प्रशंसा और न ही
  • निराशा। क्योंकि तुम जानते हो कि तुम क्या हो।
  • अपने हृदय को कभी भी असफल होने पर निराश मत करो। तुम उसके लिए अच्छा प्रयास करो।
  •  केवल एक ही ईश्वर है और वह सभी का ईश्वर है। इसलिए यह आवश्यक
  • है कि ईश्वर के सामने सभी को एक समान रहना चाहिए। 9 हम हमेशा कहते हैं कि हमें एक हिंदू को अच्छे हिंदू की तरह, एक मुसलमान की अच्छे मुसलमान की तरह और कैथेलिक को अच्छे कैथेलिक
  • की तरह मदद करनी चाहिए। । अगर हम वास्तव में प्रेम करना चाहें तो हम यह सीख जाएंगे की कैसे माफकिया जाय।
  •  यह गरीबी ही है जो अजन्मे बच्चों को मारती है, इसलिए तुम अगर चाहोंतो जीवन दे सकते हो।
  •  अगर हम प्रार्थना करें तो हमें विश्वास करना चाहिए, अगर हम विश्वास
  • करते हैं, तो हम प्रेम करेंगे, अगर हम प्रेम करेंगे तो हम सेवा करेगें।। हम बड़ा कुछ नहीं कर सकते, केवल छोटी चीजों को बड़े प्रेम से कर सकते
  • तुम और मैं, एक चर्च नहीं हैं, नहीं? हमलोग केवल अपने लोगों के साथ मिलते हैं और बांटते हैं। आज हम लोग पीड़ित हैं क्योंकि लोग आज जमा । करने में लगे हैं, वे देते नहीं है और न ही बांटते हैं। जीसस ने इसे बहुत । स्पष्ट बनाया है। तुम, जब भी, जरा भी मेरी सांसों के लिए कुछ करते हो। तुम मेरे लिए करते हो। एक ग्लास पानी देते हो, वो भी मुझे ही देते हो। अगर एक बच्चे को गोदलेते हो वह मुझे ही लेते हो।
  •  केवल हम स्वर्ग में ही यह देखेंगे कि हमने गरीबों को कितना दिया और
  • उसकी कितनी मदद की। हे ईश्वर ! मुझे इतना सम्पन्न बनाओ कि में विश्व। में रहने वाले गरीबी और भूख से मर रहे लोगों की मदद कर पाऊं। उन्हें
  • about mother teresa in hindi
  • short story

mother teresa hindi story

About Mother Teresa In Hindi - 9.8

9.8

95+

mother teresa hindi story best essay in hindi mother teresa

Tags
Show More

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Close
Close